Thursday, September 1, 2011

हिंदी-अंग्रेजी


हिंदी-अंग्रेजी
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पंडित देशीलाल से,मिले विदेशी  चंद
हिंदी इंग्लिश के लिए,शुरू हो गया द्वन्द
शुरू हो गया द्वन्द,आई बातों में तेजी
देशी बोले छात्र बिगड़ते पढ़ अंग्रेजी
बचपन से ही जानवरों के नाम पढ़ाते
तो बच्चों में संस्कार पशुओं के आते

अंग्रेजी की प्राइमर,चिड़िया खाना एक
A से होता 'एस' है,C से होती 'केट '
C से होती केट,'डोग' होता है D से
F 'फोक्स'G 'गोट',H ,मतलब मुर्गी से
घोटू O  से 'ओक्स'और P से 'पिग' सूअर
R 'रेट' और Z 'जेब्रा',सभी जानवर
3
बात विदेशीचंद ने,सुनी लगाकर ध्यान
 'क्लीन शेव्ड 'से फेस पर,फ़ैल गयी मुस्कान
फ़ैल गयी मुस्कान,कहा यदि यही सचाई
तो जो आज देश में बड़ी भुखमरी छाई
उसका कारण है बच्चे हिंदी पढ़ते है
पढ़ते कम है,खाने पर ज्यादा मरते है

बच्चा जब चालू करे,अपना अक्षर ज्ञान
अ से पढ़े 'अनार'वो,आ से होता 'आम'
आ से होता आम,'ईख 'ई ,इ से 'इमली
और अं से 'अंगूर ,'ककड़ीयां' क से पतली
ख से 'खरबूजा'खाने को जी चाहेगा
खाक पढ़ेगा बच्चा,पेटू हो जाएगा

मदन मोहन बाहेती'घोटू'


  

न नौ मन तेल होगा,न राधा नाचेगी


न नौ मन तेल होगा,न राधा नाचेगी
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(कुछ प्रतिक्रियाएं )
                  १
राधा को नाचना तो नहीं आता,
मगर बहाने बनाती है
कभी आँगन को टेढ़ा बताती है
तो कभी नौ मन तेल मांगेगी
क्योंकि वो जानती है,
न नौ मन तेल होगा होगा,
न राधा नाचेगी
   २
राधा, नाचने के लिए,
अगर नौ मन तेल लेगी
तो इतने तेल का क्या करेगी?
क्या पकोड़ियाँ तलेगी?
और अगर इतनी पकोड़ियाँ खायेगी
तो खा खा कर मोटी हो जाएगी
फिर कमर कैसे मटकायेगी
और क्या नाच भी पाएगी?
       3
  हमारे कृष्ण कन्हैया
 कितने होशियार थे
बांसुरी बजा देते थे
और बिना नौ मन तेल के,
राधा को  नचा देते थे
जैसे मिडिया वाले,
टी.वी. बजा बजा देते है
सत्ता की राधा को,
नचा नचा देते है
         ४
अगर नौ मन तेल बचाना है,
और राधा को नचाना है
तो कोई आइटम सोंग बजा दो
खुद भी नाचने लगो,
और राधा को भी नचा दो
           ५
शादी के पहले,
तुमने नौ मन तेल देकर ,
राधा को खूब नचाया
पर शादी के बाद,
जब रुक्मणी आएगी
तो तुम्हे इतना नचाएगी
की मज़ा आ जायेगा
तुम्हारा,नौ मन से भी ज्यादा,
तेल निकल जायेगा
            6
गोकुल में,
जब थे कृष्ण और राधा
दूध ,दही,मक्खन खाते थे
और दोनों,गोप गोपियों के संग,
नाचते गाते थे
मक्खन और घी इतना होता था,
की हर कोई,
पुए,पूरी और पकवान,
देशी घी ने पकाता होगा
तेल कौन खाता होगा?
 इसलिए मेरा ये मत है
की ये मुहावरा ही गलत है
          ७
नाचने के लिये,
नौ मन तेल की मांग करना,
एक दम,ना इंसाफी है
राधा को नचाने के लिये,
तो बांसुरी की धुन,
और कान्हा का प्यार ही काफी है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

मै भी अन्ना-तुम भी अन्ना

मै भी अन्ना-तुम भी अन्ना
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मै भी अन्ना,तुम भी अन्ना,हम सब है अन्ना का सब बल
अड़े मिटाने को आन्दोलन,चिदंबरम जी और श्री सिब्बल
और साथ में ,लाठी लेकर,दिल्ली पुलिस दिखाती सब बल
देखा जन सैलाब उमड़ता,मन मसोस के चुप थे केवल
साधू वेश में,अग्निवेश जी,बन कर के कुटिलों के साथी
करते बात फोन पर दीखे,अन्ना को बतलाते हाथी
काम कर रहे हैं जयचंद का,लगा लगा जय हिंद का नारा
लूट रहे मोहम्मद गौरी बन,भ्रष्टाचारी, देश हमारा

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

तूती की आवाज़

तूती की आवाज़
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         1
गाँव में,वो बड़े नेता हैं
उनका रौब है ,उनकी चलती है
जनता उनके आस पास डोलती है ,
लोग कहतें है,उनकी तूती बोलती है
वो ही गाँव के बुलंद नेता,
जब दिल्ली जाते हैं
तो मिमियाते हैं या रहते मौन है
क्योंकि नक्कार खाने में ,
तूती की आवाज़ ,सुनता ही कौन है?
             २
मेढक,जब कुए में टरटराता  है
खुद को कुए का बादशाह समझता है
पर जब कुए के बाहर आता है
तो बस फुदकता ही रह जाता है
बाहर के शोर उसकी टर टर जाने कहाँ खो जाती है
बिलकुल भी सुनने में नहीं आती है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

रस्सी की पीड़ा

रस्सी की पीड़ा
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कूए  के पत्थर पर
रस्सी ने चल चल कर
जब बना दिए अपने निशान
सब करने लगे उसका गुण गान
उसके काम और नाम का शोर हो गया है
पर किसी ने नहीं देखा,
रोज हजारों बाल्टियों का,
बोझ खींचते खींचते,
और पानी में भीजते,
उसका रेशा रेशा,कितना कमजोर हो गया है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'