Friday, March 29, 2013

आम आदमी

               आम  आदमी

एक दिन हमारी प्यारी पत्नी जी ,
आम खाते खाते बोली ,
मेरी समझ में ये  नहीं आता है
मुझे ये बतलाओ ,आम आदमी ,
आम आदमी क्यों कहलाता है 
हमने बोला ,क्योंकि वो बिचारा ,
सीधासादा,आम की तरह ,
हरदम काम आता है
कच्चा हो तो चटखारे ले लेकर खालो
चटनी और अचार बनालो
या फिर उबाल कर पना बना लो
या अमचूर बना कर सुखालो
और पकने पर चूसो ,या काट कर खाओ
या मानगो शेक बनाओ
या पापड बना कर सुखालो ,
या बना लो जाम
हमेशा,हर रूप में आता है काम
वो जीवन भी आम की तरह ही बिताता है
जवानी में हरा रहता है ,
पकने पर पीला हो जाता है
कच्ची उम्र में खट्टा और चटपटा ,
और बुढापे में मीठा, रसीला हो जाता है
जवानी में सख्त रहता है ,
बुढापे में थोडा ढीला हो जाता है
और लुनाई भी गुम हो जाती,
वो झुर्रीला  हो जाता है
अब तो समझ में आ गया होगा ,
आम आदमी ,आम आदमी क्यों कहलाता है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

बाली

                 बाली

सुबह उठा ,बोली घरवाली ,क्या मुश्किल कर डाली
ढूंढो ढूंढो ,नहीं मिल रही  ,मेरे कान   की   बाली
हम बोले ,आ गया  बुढापा,उमर नहीं अब बाली
और  कान की बाली तक भी ,जाती नहीं संभाली
पत्नी  बोली मुझे डाटते ,ये है बात निराली 
शैतानी तो तुम करते हो, खोती मेरी  बाली
मै बोला सुग्रीव सरल मै ,महाबली तुम  बाली
मेरी आधी शक्ति तुम्हारे सन्मुख होती खाली
सुन नाराज हुई बीबीजी ,ना वो बोली  चाली
उसे मनाने ,चार दिवस को ,जाते है हम बाली
घोटू
( हम अगले सप्ताह के लिए बाली भ्रमण पर
 ले जा रहे है अपनी पत्नी को मनाने -अत :एक
सप्ताह की ब्लोगिंग की छुट्टी -----घोटू  )