Tuesday, March 17, 2020

है रंग भरा पूरा जीवन

होली के त्योंहार पर ,रंगों की बहार होती है
पर अगर गौर से देखा जाए तो,
हमारी सारी जिंदगी ही रंगों से गुलजार होती है
बचपन में करते हुये पीले पोतड़े
जब हम होते है बड़े
तो माँ हमें लगा दिया करती है काला टीका ,
जिससे हम पर किसी की बुरी नज़र न पड़े
फिर स्कूल में पढ़ने के दरमियाँ
करते है पेन और पेन्सिल से ,काली नीली कापियां
और फिर जब कॉलेज जाते है
तो वहां का वातवरण  काफी रंगीन पाते है
साथ पढ़नेवाली हर लड़की लगती है परी
देख कर तबियत हो जाती है हरी
काली काली लहराती जुल्फें और गुलाबी गाल
और उस पर आग बरसाते होठ लाल लाल
देखने में हर लड़की रंगीली होती है
और ज़रा सा छेड़ दो तो लाल पीली होती है
उनके हुस्न का रंग कुछ ऐसा चढ़ता है
कि उनके संग रंगरलिया मनाने को दिल करता है
और एक दिन ऐसी हुस्नपरी भी मिल जाती है
जो हमारे नाम की मेंहदी लगाती है
उसके हल्दी चढ़े पीले हाथ हमारे हाथ में आते है
हम उसकी मांग को सिन्दूरी रंग से सजाते है
कुछ दिनों तक तो हमारी तबियत रहती है हरी
पर जब पत्नी जी की गोद हो जाती है हरी
छूट जाती है सब मौज
जब पड़ता है गृहस्थी का बोझ
समय के संग ,अनंग के सब रंग उड़ जाते है
लाल पीले खुशबू वाले फूलों के रंग ,
रसोई की लालमिर्च ,पीली हल्दी,
 और हरे धनिये में बदल जाते है
और हम माया के चक्कर में उलझ जाते है
कभी कभी कालाबाज़ारी कर,
 काली कमाई भी करनी पड़ती है  
और जैसे जैसे उमर बढ़ती है
प्यार का रंग पीला पड़ने लगता है ,
जवानी हरी झंडी दिखने लगती है
काले काले घनेरे केश
होने लगते है सफ़ेद
अंग अंग सूखे हुए गुलाब की,
 पंखड़ियों की तरह झुर्राने लगता है
काली मतवाली आँखों में धुंधलका छाने लगता है
और तेज चमकता सूर्य ,
सुनहरी होता हुआ अस्ताचल गामी हो जाता है
देखा आपने ,रंगों से हमारे जीवन का कैसा नाता है

मदन  मोहन  बाहेती 'घोटू '
बढ़ रही उमर के लक्षण  


बढ़ रही उमर के ये लक्षण
झुर्राया  तन ,झल्लाया  मन
अस्ताचल गामी ,प्रखर सूर्य ,
ढल रहा इस तरह है यौवन

थे कृष्ण कभी,अब श्वेत केश
कुछ हुए बिदा ,कुछ बचे शेष
था जीवन जो चटपटा कभी ,
अटपटा हुआ जाता हर क्षण
बढ़ रही उमर के ये लक्षण

विचरण करते स्वच्छंद कभी
अब हम पर है प्रतिबंध सभी
हो गयी देह है मधुमेही ,
और क्षीण दृष्टी हो गए नयन
बढ़ रही उमर के ये लक्षण

जिनने घर भर रख्खा संभाल
खुद को भी ना सकते संभाल
अब संभल संभल कर चलता है ,
तन कर के चलता था जो तन
बढ़ रही उमर के ये लक्षण

बच्चे खुश है निज नीड बसा
हम तड़फ रहे ,मन पीड़ बसा
हमने घिस घिस ,खुशबू बांटी ,
खुद  रहे काष्ठ ,कोरे  चन्दन
बढ़ रही उमर के ये लक्षण

मदन मोहन बाहेती 'घोटू ' 
करोना का कहर

लगा लूं उनको गले ,आजकल नहीं मुमकिन ,
अब तो पाबंदी लगी ,हाथ भी मिलाने की
खांस कर ,कर नहीं सकता इशारा आने का ,
लगी है हर तरफ ही चौकसी  जमाने  की
चलेगा काम कैसे दूर से नमस्ते कर ,
करता जी ,हाथ धो के उनके पीछे पड़ जाऊं
करो ना ये ,करो ना वो ,करोना तूने भी ,
बंदिशें कितनी लगा दी है ,मैं  कहाँ जाऊं

घोटू