Thursday, May 8, 2014

चुनाव के बाद-ऐसा भी हो सकता है

चुनाव  के बाद-ऐसा भी हो सकता है

इस बार 'नमो' की आंधी ने, मौसम इस कदर बदल डाला
हो गयी जमानत कई जप्त ,कितनो ने बदल लिया  पाला
पड़ गए मुलायम और नरम,माया का हाथी गया बैठ
लालू की लालटेन का भी ,अब खत्म हो गया घासलेट
डिग्गीराजा ,फिर से दुल्हेराजा ,बनने में है  व्यस्त हुए
 छोटे मोटे दल,तोड़ फोड़ की राजनीती से पस्त  हुए
जयललिता भी लालायित थी ,पाने को कुर्सी दिल्ली की
जनता का मिला फैसला तो,अब चुप है भीगी बिल्ली सी
केजरीवाल है जरे जरे ,झाड़ू फिर गयी उम्मीदों पर
शेखी नितीश की इति हुई ,नम है ममता ,निज जिद्दों पर
चुप चुप बैठे है चिदंबरम ,बीजूजी,बिजना हिला रहे
और है पंवार ,पॉवर प्रेमी ,मोदी सुर में सुर मिला रहे
मनमोहनजी है मौन शांत ,क्या जरुरत है कुछ कहने की
पिछले दस सालों में आदत ,पड़  गयी उन्हें चुप रहने की
शहजादा ,ज्यादा ना बोले ,मेडमजी का दम निकल गया
है डरा वाडरा परिवार ,किस्मत का चक्कर बदल गया
सो नहीं सोनिया जी पाती,सिब्बल जी भी ,बलहीन  हुए
जबसे मोदी जी ,दिल्ली की ,कुर्सी पर है आसीन  हुए

मदन मोहन बाहेती'घोटू'  

रूप तुम्हारा

         रूप तुम्हारा

बड़ा  सुन्दर और सुहाना ,हसीं तेरा रूप है
गर्मियों की तू है बारिश,सर्दियों की धूप है
ठिठुरते मौसम में ,होठों से लगे तो ये लगे ,
चाय का है गर्म कप या टमाटर का सूप  है

घोटू

अंकल की पीड़ा

          अंकल की पीड़ा

कल तक हम नदिया जैसे थे,बहते कल कल
कलियों संग करते किलोल थे मस्त कलन्दर
कन्यायें   हमसे मिलने , रहती थी  बेकल
काल हुआ प्रतिकूल ,जवानी गयी ज़रा ढल
बहुत कलपता ,कुलबुल करता ,ह्रदय आजकल
कामनियां ,जब हमें बुलाती ,कह कर 'अंकल '

घोटू

भूगोल

संसद के गलियारों में एक चर्चा या अफवाह सुनने को मिली
एक वृद्ध राजनेता जो कि अपने से काफी काम उम्र की महिला
से विवाह कर रहे है ,जब पहली बार उससे मिले ,तो उस महिला ने
उन्हें 'अंकल'कह कर बुलाया था और इस पर उन्होंने जो उत्तर दिया था
उस से ही प्यार की शुरुवात हुई थी -  उंन्होने क्या कहा था ,वह निम्न
पंक्तियों में वर्णित है
'
'अब भी आवाज में मेरी ,बुलंदी  वो कि वो ही है ,
                     पुराना हो गया है पर,नहीं ये ढोल बदला है
वो ही फ़ुटबाल का मैदान है,वो ही खिलाड़ी है ,
                      नहीं तो ही 'बाल' बदली है ,और ना गोल बदला है
पुरानी चीज बनके 'एंटीक'हो जाती है मंहगी ,
                        हुआ  अनमोल हूँ मैं ,ना  ही मेरा मोल बदला है
मुझे कह कर के 'अंकल 'क्यों. कलेजे को जलाती हो,
                        मेरा इतिहास बदला है ,नही  भूगोल  बदला है

घोटू  

Wednesday, May 7, 2014

गरमी और चुनाव

                    गरमी और चुनाव

पत्नी बोली ,गरम हो रहा है ये मौसम
चलो घूमने ,थोड़े दिन तक हिलस्टेशन
खर्चा पर जब ट्रेवल एजेंट ने बतलाया
सुन कर ऐ.सी. में भी हमें पसीना  आया
हमने पत्नी को समझाया ,सुनिए मेडम
गर्मी से चुनाव की गरम हुआ है मौसम
नेताओं ने रैली कर के ,भीड़ बुला के
आपस में गाली गलोच कर के चिल्ला के
एक दूसरे की पगड़ी को बहुत उछाला 
बहुत गरम है वातावरण ,बना ये डाला
इसीलिये तुम इस प्रचार को थमने तो दो
और नतीजा  ,इसका ज़रा निकलने तो दो
गरमी खा,गाली दे बजा रहे जो  डंडे
सब के सब ऐसे ही पड़  जाएंगे ठन्डे
ये ठन्डे  तो ठंडा हो जाएगा  मौसम 
हिलस्टेशन जा क्यों व्यर्थ करें खर्चा हम

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

डिग्गीराजा का बेंड बाजा

      डिग्गीराजा  का बेंड बाजा
                      १
प्रेमी पार्टी प्रवक्ता ,प्रिया टी वी एंकोर
करने में बकवास सब,दोनों ही सिरमौर
दोनों ही सिरमौर,मिले और प्यार हो गया
अमृत चखने  को बुड्ढा तैयार हो गया
डिग्गी राजा फिर से बन कर दूल्हे राजा
अब न डुगडुगी ,बल्कि बजाएं,बेंड और बाजा
                       २
मिलकर मेडम राय से ,किया किसी ने तर्क
तुम दोनों की  उमर  में ,तो है काफी फर्क
तो है काफी फर्क, अमृता  जी मुस्काई
बोली  जब  है प्यार ,उम्र ना पड़े दिखाई
अच्छी इनकम है,धन है,बुड्ढे में दम है
और मैं रानी कहलाउंगी ,ये क्या कम है
                       ३
डिग्गी दांत निपोर कर ,हुए प्रेम अनुरक्त
लिया किसी ने पूछ ये ,तुम राहुल के भक्त
तुम राहुल के भक्त ,कर रहे ब्याह दुबारा
और तुम्हारा 'बॉस' अभी तक बैठा  कंवारा
डिग्गी बोले,रहा इसलिये मैं शादी कर
धर्म भक्त का,करे बॉस को वो 'इंस्पायर'

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

Tuesday, May 6, 2014

दिग्गी राजा की राय

           दिग्गी राजा की राय

लोकसभा के टिकिट का  ,किया बहुत ही ट्राय
लेकिन हाईकमान ने ,सुनी न उनकी राय
सुनी न उनकी राय ,फेर में राजयसभा के
ऐसे  उलझे ,गिरे 'राय ',गोदी   में   जाके
तोड़ फोड़ की राजनीति से बाज न आये
तोडा उसका घर ,उसके संग नयन मिलाये
घोटू