Wednesday, December 23, 2015

बाप का माल

             बाप का माल

भगवान ने पहले सूर्य,चन्द्र  को बनाया ,
सुन्दर  पहाड़ों,वृक्षों और प्रकृती का सृजन किया 
नदियां बनाई ,हवाये चलाई ,
और फिर जीव ,जंतु और इंसान को जनम दिया
हमने सूरज के ताप से बिजली चुराई
हवाओं के वेग से भी बिजली बनाई
नदियों का प्रवाह से वद्युत का उत्पादन किया
प्रकृती की हर सम्पति  का दोहन किया
हम हवा से ऑक्सीजन चुराते है
तब ही तो सांस ले पाते है
धरा की छाती को छील ,अन्न उपजाते है
तब ही जीवन चलाते है
सूरज की धूप से गर्मी और रोशनी चुराते है
जमीन की रग रग में बहते पानी से प्यास बुझाते  है
प्रकृति की हर वनस्पति और फलों पर,
अपना  अधिकार रखते है
और तो और ,अन्य जीवों को भी पका कर ,
अपना पेट भरते है
हम सबसे बड़े चोर है
 और खुले  आम चोरी करते है
और उस पर तुर्रा ये ,
किसी से नहीं डरते है
और इस बात का हमारे मन में,
जरा भी नहीं मलाल है
क्योंकि हम भगवान की संतान है ,
और ये हमारे बाप का माल है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'  

Wednesday, December 16, 2015

सोने की फ्रेम में जड़ी तस्वीर

 सोने की फ्रेम में जड़ी तस्वीर

मैंने अपने दिल के कोरे,
 कैनवास पर सच्चे मन से
सुंदर सी एक तस्वीर बनाई थी ,
बड़ी लगन से
चाँद को चूमने की आशा लिए ,
एक मासूम विहंग
अपने  पंख फैलाये ,गगन में,
उड़ रहा था स्वच्छंद
मैंने उस चित्र को ,
सोने की फ्रेम मे जड़वा ,
अपने ड्राइंग  रूम में टांगा
यह सोच कर कि इससे ,
हो  जाएगा सोने में सुहागा
पर मैं  कितना गलत था
आज मुझे वो पंछी ,
अपने पंख पसारे ,
आसमान में उड़ता हुआ नहीं ,
सोने की फ्रैंम के पिंजरे में ,
छटपटाता नज़र आता  है
कई बार सोने की फ्रेम में फंस ,
जीव कितना मजबूर हो जाता है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'


ऊंचे लोग -ऊंची पसंद

      ऊंचे लोग -ऊंची पसंद

शिराओं में ,उच्चस्तरीय रक्तचाप
बातों में मधुमेह मयी  मिठास
आँखों में मोतियाबिंद बिराजमान
सर पर चांदी से केशो की शान
स्वर्ण के प्रति मोह इतना कि ,
स्वर्ण को भी भस्म करके खाते  है
लोह तत्व की अल्पता के कारण ,
हर किसी से लोहा लेने को तैयार हो जाते है
प्रकृती से प्रेम इतना कि सर्दियों में भी,
'बसंत कुसुमाकर रस'और  'चंद्रप्रभा वटी 'का
 लेते है  आनंद
ऊंचे लोग ,ऊंची पसंद

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

फेस बुक स्टेटस

     फेस बुक स्टेटस

विदेश बसे  बेटे से बाप ने फोन किया ,
बेटा कई दिनों तुमने कोई समाचार नहीं दिया
सप्ताह में कम से कम
एक बार तो फोन कर लिया करो तुम
बेटा बोला 'पापा ,चिंता मत किया करो
फेसबुक पर रोज मेरा स्टेटस देख लिया करो
और आप की  फेसबुक पर भी ,
यदि आपका स्टेटस' अप टू  डेट'रहेगा
तो हमको भी ,आपके बारे में ,
सब पता लगता रहेगा
पिता के अंतर्मन ने ,बुझे स्वर में कहा,बेटा
ये बूढ़ा  जब  अचानक  मरेगा
तो स्टेटस कौन 'अप टू डेट' करेगा ?

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

हम वो पुराना माल है

               हम वो पुराना माल है

चूरमे की तरह वो ,मीठी,मुलायम,स्वाद है ,
 और बाटी की तरह ,मोटी  हमारी खाल है
वो है जूही की कली ,प्यारी सी खुशबू से भरी,
फूल हम भी मगर  गोभी सा हमारा हाल है
वो है छप्पन भोग जैसी,व्यंजनों की खान सी ,
और हम तो सीधे सादे ,सिरफ़ रोटी दाल है
सारंगी से सुर सजाती है मधुर वो सुंदरी ,
हम पुरानी ढोलकी से , बेसुरे  ,बेताल  है
काजू की कतली सी है वो और हम गुड़ की गजक ,
खनखनाती वो तिजोरी ,हम तो ठनठन पाल है
एल ई डी का बल्ब है वो ,टिमटिमाते हम दिये ,
कबाड़ी भी नहीं ले ,हम वो पुराना  माल है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'
            

Sunday, December 13, 2015

लूटो भी,लुट कर भी देखो

       लूटो भी,लुट कर भी देखो

कुछ दुनियादारी ने लूटा ,
           कुछ झूंठे सपनो ने लूटा
तुमने जिन पर प्यार लुटाया,
          तुमको उन अपनों ने लूटा
मीठी मीठी बात बना कर,
           लूटे हमे  जमाना   सगला
फिर भी ख़ुशी ख़ुशी लुटते  है,
          लोग समझते हमको पगला
अरे लूटता तो वो ही है,
          जिसके पास न कुछ होता है
और लुटता है वो ही जिसका ,
           कि  भण्डार  भरा होता  है
कभी किसी से प्यार करो तुम,
          कभी किसी पर लुट कर देखो
लुटने  की अपनी मस्ती  है,
           कभी किसी पर मर मिट देखो
लुटने में आनंद बहुत है
            कभी समर्पित हो क र देखो
मन में सच्चे भाव लिए तुम,
          अपना सब कुछ खोकर देखो
तुम जो कुछ खोवोगे उसका,
             तुम्हे कई गुणा  मिल जाएगा
मन की उलझन सुलझ जाएगी ,
           पुष्प प्यार का  खिल जाएगा
अगर लूटना है तो लूटो,
              राम नाम की लूट मची है 
लूटो नाम और यश लूटो,
               थोड़ी सी तो उमर बची है
लुटने और लूटने में बस ,
                एक मात्रा  का है अन्तर
अगर लुटोगे   सच्चे मन से ,
             सुख लूटोगे तुम जीवन भर

मदन मोहन बाहेती'घोटू'
             
                       
               
        
    
          
       

व्यवहार

             व्यवहार
कितनी ही मंहगी चमकीली,
फ्रेम  भले ही हो ,चश्मे की ,
लेकिन लेंस जब सही होते ,
तब ही साफ़ नज़र  आता है
सजधज कर कोई कितनी भी,
दिखने लग जाती हो सुन्दर ,
पर दिल कैसा ,यह तो  उसका ,
बस व्यवहार  बता पाता  है

          व्यवस्थाएं

अलग अलग लोगों की ,
अलग अलग जिद और व्यवहार
देता है समाज की ,
व्यवस्थाओं को आकार

घोटू