Sunday, June 21, 2020

आज का दिन

आज का दिन ,योग का दिन
और भगाओ रोग का दिन
स्वस्थ हो तन खुश रहे मन
ये कई संयोग का दिन

आज है संगीत का दिन
मधुर स्वर और गीत का दिन
तार दिल के करे झंकृत ,
प्रीत और मनमीत का दिन

आज दिन सूरज ग्रहण है
सूर्य घटता ,हरेक क्षण है
ग्रसित होकर लुप्त होगा ,
पायेगा फिर नवजीवन है

आज दिन 'फादर 'स डे 'है
आज हम जो कुछ बने है
वंदना उस जनक की है ,
जिनका आशीर्वाद ये है

आज है सबसे बड़ा दिन
देखलो कितना चढ़ा दिन
आज 'सेल्फी 'का दिवस है
कैमरा लेकर खड़ा दिन

घोटू  



Friday, June 19, 2020

मोहब्बत का मसला

मोहतरमा से हुई मोहब्बत ,मोह जाल में उलझ गया
गाल गुलाबी ,तिरछी नज़रें ,अधर लाल में उलझ गया
'घोटू 'इस फेरे में फंस कर ,उन संग फेरे सात  लिये ,
बैल बन गया मैं कोल्हू का ,रोटी दाल में उलझ गया
उनसे आँखें चार हुई क्या ,चार दिनों के जीवन में
कैसे पैसे चार कमाऊं ,इस सवाल  में  उलझ गया
संगदिल के संग,दिल मिलने की,ऐसी मुझको मिली सजा
रंग ढंग बदल गया जीवन का ,तंगहाल में उलझ गया
तेज बड़ा ही धार दार होता हथियार ,हुस्न का है ,
उसकी मादक मार सुहाती ,यार प्यार में उलझ गया

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

Thursday, June 18, 2020

संकट का सामना

संकट तो है आते जाते
करे सामना ,हम मुस्काते

शीतकाल में ठिठुरा करते
हो जब ग्रीष्म ,तपन से डरते
बारिश शीतल जल बरसाती
पर ज्यादा हो ,नहीं सुहाती
लाती बाढ़ ,अधिक बरसाते
संकट तो  है आते  जाते

रोज रोज ,कुछ ना कुछ होना
कल तक फ्लू था ,आज करोना
फ़ैल रहा यह दुनिया भर में
दहशत सी फैली घर घर में
बुरी बला से सब घबराते
संकट तो है आते  जाते

बार बार और जगह जगह पर
धरती काँप रही रह रह कर
उठती मन में आशंकायें
बड़ा जलजला ना आ जाये
बुरे ख्याल है हमें जगाते
संकट तो है आते जाते

सीमाओं पर चीनी ड्रेगन
है फुंकारता,उठा रहा फ़न
पकिस्तान ,उधर आतंकी
रोज रोज देता है धमकी
विपदा के बादल मंडराते
संकट तो है आते जाते

परिस्तिथियाँ बड़ी विकट है
सभी तरफ संकट संकट है  
इनको है जो अगर थामना
हम हिम्मत से करें सामना
साहसी सदा ,विजयश्री पाते
संकट  तो  है  आते  जाते

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
चीन की बीन बजायेंगे

चैन की बीन बजानेवाले ,चीन की बीन बजायेंगे
कालिया नाग नचाने वाले ,ड्रेगन को भी नचायेंगे

चंद मिसाइल बना लिए क्या जिनके बल तू ऐंठा है
चिन्दी क्या पा ली चूहे ने , तू  बजाज बन बैठा  है
 बार बार पंगे लेता है ,बड़ी बुरी ये आदत है
ये उन्नीस सौ बांसठ का ना ,ये मोदी का भारत है
चीनी के बर्तन के जैसा ,तुमको तोड़ दिखायेंगे
चैन की बीन बजानेवाले ,चीन की बीन बजायेंगे
 
बाज आओ अपनी हरकत से,वर्ना तुम पछताओगे
हमसे जो टकराओगे तो चूर  चूर हो जाओगे
गलवान ना ,माँद शेर की ,में तुमने सर डाला है
ये मत भूलो ,अबकी बार ,पड़ा मोदी से पाला है
हम चीनी की बना चाशनी ,डुबा जलेबी खायेंगे
चैन की बीन बजानेवाले ,चीन की बीन बजायेंगे

मुख में राम ,बगल में छुरी का चरित्र तुम्हारा है
तुमने कोरोना फैला कर ,कितनो को ही मारा है
छोडो चलना चाल, तुम्हारा बुरा हाल हम कर देंगे
ईंट अगर फेंकोगे तुम ,हम उत्तर में पत्थर देंगे
जिनपिंग,पिंगपांग खेलोगे ,नानी याद दिलायेंगे  
चैन की बीन बजानेवाले ,चीन की बीन बजायेंगे    

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

Wednesday, June 17, 2020

अलग अलग दुनिया

प्रभु ने रचा एक भूमण्डल ,माटी पत्थर ,जल भर कर
गोलमोल है,घूम रहा ,वो भी टेड़ा ,निज धुरी  पर
फैली कहीं घनी हरियाली ,और कहीं  है मरुस्थल
सर्दी गरमी ,बारिश सूखा ,चलता ऋतुओ का चक्कर
 खड़े पहाड़ और भरे समंदर ,नदियां ,नाले बहते है
ईश्वर की इस अनुपम कृति को हम सब दुनिया कहते है
ये सब तो है भौतिक दुनिया ,एक मानसिक है दुनिया
तेरी मेरी उसकी इसकी ,सबकी अलग अलग दुनिया
मेरी बीबी , घर बच्चे  है  ,यह मेरी अपनी दुनिया
तेरी बीबी , घर बच्चे  है  यह तेरी अपनी दुनिया
इतने ज्यादा आत्म केन्द्रित ,कि बस मैं ,मेरी मैना
सब अपनी दुनिया में सिमटे ,फिर दुनिया से क्या लेना
परिवार मेरा, मेरा घर ,मेरा पैसा , और  इज्जत
जाते भूल , जिंदगी जीने ,प्रभु की दुनिया आवश्यक
वो ही हमको  देती है जल  ,वृक्ष दे रहे ऑक्सीजन
खाने को फल ,धान्य दे रही  ,जिनसे चलता है जीवन
और बसाने अपनी दुनिया ,हम वृक्षों को काट रहे
रची प्रभु ने है जो दुनिया ,कर उसको बरबाद  रहे
ये मत भूलो ,जब तक ये दुनिया ,तब तक अपनी दुनिया
इस दुनिया का ख्याल रखो ,ये  तो  है हम सबकी दुनिया

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '
कोरोना की दहशत

सारी फुर्ती फुर्र हो गयी ,आलस ने डाला डेरा
कोरोना की कोपदृष्टी से ,बैठ गया भट्टा मेरा
सारा बेड़ा गर्क कर दिया ,ऐसा मारा मंदी ने
कामों पर कस दी लगाम ,इस लम्बी तालाबंदी ने
कोई सांप सा सूंघ गया हो ,ऐसी मन में दहशत है
हुये हौसले पस्त बची ना ,थोड़ी सी भी हिम्मत  है
लकवा जैसा मार गया  है ,जोश गया पानी लेने
मालगाड़ी की चाल चल रही ,थी जो एक्सप्रेस ट्रेने
हर कोई है ख़ौफ़ज़दा और सहमा सहमा सा मन में
कभी कल्पना भी ना थी वो हुआ हादसा जीवन में
बार बार भूकंप आ रहे ,सीमा पर हड़कंप मचा
किये गुनाह कौनसे हमने ,जिनकी मिलती हमें सजा
पिछले तीन माह में हमको,क्या क्या ना दिखलाया है
हे प्रभु क्या है तेरे मन में ,ये तेरी क्या  माया  है
तूफानों में नाव हमारी डगमग डगमग भटक रही
तू ही इसको पार लगा दे ,बता रास्ता सही सही
या फिर ले अवतार ,मिटा दे ,कोरोना की हस्ती को
पहले सा खुशहाल बना दे नगर ,गाँव हर बस्ती को
बन प्रकाश आलोकित पथ कर,अन्धकार ने है घेरा
फुर्र हुई फुर्ती फिर आये ,हो उपकार अगर तेरा

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '  


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Regards
Vikki Vezina �












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