Sunday, July 4, 2021

अब मैं नाच्यो बहुत गोपाल 
 लड़की एक जिया को भायी,दिल ना सक्यो संभाल खुशी फिरयो मैं नाच्यो नाच्यों, अपना जियो उछाल
 हुई सगाई सखा संग नाच्यो,खूब मचाई धमाल 
 शादी में ,बारात में नाच्यो,गले पड़ी वरमाल 
 बाद इशारन पर पत्नी के ,नाच रयो हर हाल
 शादी बाद गृहस्थी को फिर ऐसो फस्यो जंजाल
 अब दिन रात फिरत हूं नाच्यो, लाने रोटी दाल
 अब मैं नाच्यो बहुत गोपाल

घोटू
बुढ़ापा अब इस तरह से कट रहा है

 एक जगह पर ध्यान केंद्रित नहीं रहता 
 बादलों सा भटक ,मन, दिन-रात रहता 
 नाचती यादें पुरानी ,नयन आगे 
 प्यार को रहते तरसते, हम अभागे
 मोह का अंधकार सारा छट रहा है 
 बुढापा अब इस तरह से कट रहा है 
 
सोते-सोते , जाग कर उठ बैठते हैं 
न जाने क्या सोचते, फिर लेटते हैं 
उचटी उचटी नींद भी है,नहीं आती 
सवेरे की प्रतीक्षा, लंबी सताती 
प्रभु सिमरन, ध्यान थोड़ा बंट रहा है 
बुढ़ापा अब इस तरह से कट रहा है 

कोड़ी कोड़ी माया जोड़ी आना पाई 
उम्र भर की बचाई, सारी कमाई 
बाद में बंटवारे को सब ही लड़ेंगे 
अभी दोगे बांट,तो सेवा करेंगे 
सोच यह मन करता बस खटपट रहा है 
बुढापा अब इस तरह से  कट रहा है 

बची तन में नहीं फुर्ती, जोश बाकी
मगर जीते ,सांस लेते, होश बाकी
भेषजों के भरोसे चलता गुजारा 
रुग्ण है मन और तन कमजोर सारा 
उम्र का दिन ,रोज ही तो घट रहा है 
बुढ़ापा अब इस तरह से कट रहा है 

उपेक्षा में अपेक्षा में तब्दील अब है
बोझ सा हमको  समझते लोग सब हैं
 प्यार की दो बात कोई भी न करता 
 यह तो वो ही जानता, जिस पर गुजरता 
 राम का ही नाम अब मन रट रहा है 
 बुढ़ापा अब इस तरह से कट रहा है

मदन मोहन बाहेती घोटू
चलो डायवोर्स ले ले 

इतने दिन तक साथ रहे हम, खुशियों के संग खेले लेकिन नखरे नहीं तुम्हारे, अब जाते हैं झेले 
जी करता है बाकी दिन में खुल कर रहे हैं अकेले 
हम पत्नी से बोले ,हम भी चलो डाइवोर्स ले ले 

आमिर खान अमृता ने भी तोड़ी अपनी शादी खुशी-खुशी अपने तलाक की कर दी आज मुनादी 
पंद्रह वर्ष पुराने रिश्ते,टूट गए पल भर में 
तू जा खुश रहअपने घर में ,मैं खुश अपने घर में 
एक दूजे पर कंट्रोल के ,होंगे दूर झमेले 
हम पत्नी से बोले ,हम भी चलो डायवर्स लेलें

पत्नी बोली,आमिर फिल्मी , छूटेगा झंझट से 
मौका मिलते ही डायवर्सिफाय करेगा ,झट से
 जल्दी और किसी के संग वो कर निकाह उलझेगा
 तुम बुढ़ऊ को ,फोकट में भी ,कोई नहीं पूछेगा 
 अपने मन में मत देखो तुम ,यूं ही ख्वाब अलबेले 
 हम पत्नी से बोले, हम भी चलो डाइवोर्स ले ले 
 
पत्नी बोली बिना विचारे करे जो वह पछताए 
आधी भी ना रहे हाथ में ,पूरी भी ना पावे 
यूं ही फिल्मी समाचार पर,ध्यान नअपना बांटे
जो भी थोड़ी उम्र बची है मिलजुल कर हम काटे 
सबकी अलग अलग परिस्थितियां अपने अपने खेले
हम पत्नी से बोले ,हम भी चलो डाइवोर्स ले ले

मदन मोहन बाहेती घोटू

Friday, July 2, 2021

भाई साहब आपकी याद आ रही है

 आज सुबह छोटे भाई का फोन आया, 
 बोला भाई साहब हम अल्फांजो आम खा रहे हैं 
 आप बहुत ज्यादा रहे हैं 
 कल जीजाजी का फोन आया था ,
आपकी बहन जी गरम गरम जलेबी बना रही है 
आपकी बहुत याद आ रही है
दो दिन पहले बहन जी का फोन आया था,
 आज शादी में दाल बाफले की रसोई थी खाई 
 आपकी बहुत याद आई 
 हद तो तब हो गई जब मायके गई बीबी का फोन आया उससे बताया 
 आज कल काले काले जामुन की बहार है 
 जब भी हम खाते हैं 
 आप बहुत याद आते हैं 
 जब इस तरह के फोन आते हैं 
 कि कुछ खाद्यपदार्थ, लोगों को मेरी याद दिलाते हैं
 तो मेरे मन में होती है एक चुभन 
 क्या इसीलिए याद किए जाते हैं हम 
 कोई मेरे प्यार को
 मेरे दुलार को 
 मेरी आत्मीयता के बंधन को
  मेरे अपनेपन को 
  मेरी अच्छाइयों बुराइयों को लेकर 
  मुझे क्यों नहीं करता है कोई याद 
  तेरी मन में भर जाता है अवसाद 
  क्या मेरी यादों के लिए खाली नहीं उनके दिल का कोइ कोना है 
  मैं सिर्फ़ खाने पीने की चीजों को देखकर याद किया जाता हूं 
  क्या मेरा मेरा व्यक्तित्व इतना बौना है?

मदन मोहन बाहेती घोटू
कन्यादान कबूल नहीं

शुभदिन था एक परी सी
तू मेरे अंगना उतरी थी
आँख खोल जब मुस्काई थी
घरभर में खुशियां छाई  थी
तेरी खुशबू महक रहा घर
तेरे कारण चहक रहा घर
तू है घर में चहलपहल है
शैतानियां और हलचल है
तेरी जिद और नखरे तेरे
रौनक रहती घर में मेरे
प्रीत तेरी सच्ची लगती है
तू सबको अच्छी लगती है
तू खुशियों का भरा खजाना
आता तुझको प्यार लुटाना
दोस्त मेरी तू सच्ची साथी
कामकाज में हाथ बंटाती
इस दुनिया में सबसे प्यारी
तू  मेरी पहचान  निराली  
निश्छल तेरा प्रेम ,हंसी है
तुझमे मेरी छवि बसी है
एक अनमोल सम्पदा है तू
तू न दान देने की वस्तू
तुझ पर तो अभिमान करूं मैं
कैसे तुझको  दान करूं  मैं
कन्यादान कबूल नहीं है
क्या ये सब की भूल नहीं है

 जग ने है ऐसा सिखलाया
बेटी होती धन है  पराया
कहते जिसे पराया हम धन
वो ही साथ निभाती हरदम
बेटी होती धन ,ये सच है
दो घर की उससे रौनक है
 वो दीपक है सबसे प्यारा
करता दो घर में उजियारा
ऐसी प्रेम भरी ज्योति  है
कभी  पराई  ना होती है
सचल सबल उत्साह से भरी
गुण और प्रतिभा की तू गठरी
तू है मेरी कोख की जाई
कैसे कह दूँ तू है पराई
तू है पुष्प प्यार का खिलता
तू टुकड़ा है मेरे दिल का
बेटा ,हो भी जाय पराया
नहीं पराई होती जाया
हम मूरख रखते है क्यों कर
बेटा और बेटी में अंतर
सोच संकुचित है समाज की
प्रगतिशील बेटी है आज की
तेरा तो सन्मान करूं मैं
कैसे तुझको  दान करूं मैं
 कन्यादान कबूल नहीं है
क्या ये सबकी भूल नहीं है

तू आई ,संवरा था जीवन
आज जारही बनकर दुल्हन
तुझे मिला एक जीवन साथी
उस संग जला, प्रेम की बाती
सुखमय हो जीवन मुस्काये
बस खुशियां ही खुशियां छाये
सास ससुर ,माँ बाप समझना
सबकी मन से इज्जत करना
वो घर खुशियों से महकाना  
इस घर में भी आना जाना
क्योंकि ये घर भी है तेरा
इतने वर्षों किया  बसेरा
यह सामजिक रीत ,ब्याहना
पड़ता है सबको निबाहना
बंधता तभी प्यार का बंधन
नयी जिंदगी को आमंत्रण
दुआ मांगते है ये हम सब
नयी जिंदगी तुझे मुबारक
ममता भरा हुआ तू बंधन
इतना तुझसे बंधा हुआ मन
तू हम सबके दिल पर छाई
तू तो है मेरी परछाई  
सब तुझ पर कुर्बान करूं मैं
कैसे तुझको दान करूं मैं
कन्यादान कबूल नहीं  है
क्या ये सबकी भूल नहीं है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '


Thursday, July 1, 2021

डॉक्टर दिवस पर धन्यवादज्ञापन 

 दर्द देकर जरा सा, जो दर्द का करता निवारण
  डॉक्टर है 
  व्याधियों से दूर बच कर ,रह रहे हम जिसके कारण 
  डॉक्टर है 
  खिला कर कड़वी दवा जो ,नींद मीठी सुलाता है 
  डॉक्टर है 
  चुभा कर के सुई ,तन के ताप को जो भगाता है 
  डॉक्टर है 
  स्वस्थ और तंदुरुस्त रहने के बताता हमें नुस्खे ,
  डॉक्टर है 
  दीर्घ जीवन पा रहे  हम, है बदौलत आज उसके 
  डॉक्टर है 
 करोना की विभीषिका में,जान अपनी डाल जोखिम डॉक्टर ने 
 जान कितनों की बचाई, करी सेवा रात और दिन 
 डॉक्टर ने 
 खाने पीने में हमारे ले के आये अनुशासन
 डॉक्टर जी 
 आज डाक्टर दिवस पर है आपका धन्यवादज्ञापन  डॉक्टर जी

मदन मोहन बाहेती घोटू

Wednesday, June 30, 2021


एक बेटी की फ़रियाद -माँ से

तेरी कोख में माँ ,पली और बढ़ी मैं
पकड़ तेरी ऊँगली,चली, हो खड़ी मैं
तेरे दिल का टुकड़ा हूँ ,मैं तेरी जायी
 नहीं होती बेटी ,कभी भी  परायी

तूने माँ मुझको ,पढ़ाया लिखाया  
सहीऔर गलत का है अंतर सिखाया  
नसीहत ने तेरी बनाया है  लायक
रही तू हमेशा ,मेरी मार्ग दर्शक
तूने संवारा है व्यक्तित्व मेरा    
तेरे ही कारण है अस्तित्व मेरा
तेरा रूप, तेरी छवि, प्यार हूँ मैं
जीवन सफ़र को अब तैयार हूँ मैं
मिले सुख हमेशा,यही करके आशा
मेरे लिए ,हमसफ़र है तलाशा
बड़े चाव से बाँध कर उससे बंधन
किया आज तूने ,विवाह का प्रयोजन
ख़ुशी से  करेगी ,तू मेरी बिदाई
नहीं होती बेटी ,कभी भी परायी

सभी रस्म मानूंगी ,जो है जरूरी
मगर दान कन्या की ,ना है मंजूरी
न सोना न चांदी ,इंसान मैं हूँ
नहीं चीज दी जाये ,जो दान में हूँ
मुझे दान दे तू ,नहीं मैं सहूंगी
तुम्हारी हूँ बेटी ,तुम्हारी रहूंगी
दे आशीष मुझको,सफल जिंदगी हो
किसी चीज की भी,कभी ना कमी हो
फलें और फूलें ,सदा खुश रहें हम
रहे मुस्कराते ,नहीं आये कोई ग़म
कटे जिंदगी का ,सफर ये सुहाना
मगर भूल कर भी ,मुझे ना भुलाना
रहे संग पति के ,हो माँ से जुदाई
नहीं होती बेटी ,कभी भी पराई

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '