मैंने पंखुड़ी में गुलाब की,हंसती बिजली ना देखी थी
बारह मास रहे जो छाई ,ऐसी बदली ना देखी थी
ना देखे थे क्षीर सरोवर,उनमे मछली ना देखी थी
सारी चीजे नज़र आ गई मैंने तुझको देख लिया है
तीर छोड़ फिर तने रहे वो तीर कमान नहीं देखे थे
पियो उम्र भर पर ना खाली हो वो जाम नहीं देखे थे
गालों की लाली में सिमटे वो तूफ़ान नहीं देखे थे
सारी चीजें नज़र आगई मैंने तुझको देख लिया हैं
चमके पूनम और अमावास ऐसा चाँद नहीं देखा था
गंगा जमुना के उदगम का ये उन्माद नहीं देखा थाi
जहाँ फूल में फल विकसे हों ऐसा बाग नहीं देखा था
सारी चीजें नज़र आगई मैंने तुझको देख लिया हैं
ढूंढा घट घट ,घट पर पनघट ,घट पनघट पर ना देखे थे
सरिता की लहरों में मैंने भरे समंदर ना देखे थे
कदली के स्तंभों ऊपर लगे आम्र फल ना देखे थे
सारी चीजें नज़र आगई मैंने तुझको देख लिया है
http://blogsmanch.blogspot.com/" target="_blank"> (ब्लॉगों का संकलक)" width="160" border="0" height="60" src="http://i1084.photobucket.com/albums/j413/mayankaircel/02.jpg" />
Monday, September 27, 2010
I HAVE SEEN YOU DEAR
I had never seen a spark
Of lighting in a rose petal
I had never seen a cloud
That remains for the whole year
I had never seen milk ponds
And fished swimming here and there
But now I have seen everything
Because I have seen you dear
After throwing the arrow
The bow remains always tight
The glass that remains full of juice
Though you drink day and night
Never seen such storms
In the blushing of cheeks so right
But I have seen every thing
Because I have seen you dear
I never seen such a moon
That shines day and night
The orgin of Ganga and Jamuna
So exciting and so bright
Where fruits bloom in flowers
Such garden was never in sight
But I have seen everything
Because I have seen you dear
Pot on a pot on a pot
I have not seen here and there
Tidal waves of ocean
In the gentle flowing of River
On a smooth banana tree
The mangos have grown ever
But I have seen every thing
Because I have seen you dear
Of lighting in a rose petal
I had never seen a cloud
That remains for the whole year
I had never seen milk ponds
And fished swimming here and there
But now I have seen everything
Because I have seen you dear
After throwing the arrow
The bow remains always tight
The glass that remains full of juice
Though you drink day and night
Never seen such storms
In the blushing of cheeks so right
But I have seen every thing
Because I have seen you dear
I never seen such a moon
That shines day and night
The orgin of Ganga and Jamuna
So exciting and so bright
Where fruits bloom in flowers
Such garden was never in sight
But I have seen everything
Because I have seen you dear
Pot on a pot on a pot
I have not seen here and there
Tidal waves of ocean
In the gentle flowing of River
On a smooth banana tree
The mangos have grown ever
But I have seen every thing
Because I have seen you dear
Sunday, September 26, 2010
जीवन के मधुरिम बसंत में
जीवन के मधुरिम बसंत में लगता फूला जग का उपवन
रस की लोभी मधुमख्खी सी चंचल दृग की चंचल चितवन
महक रहे कलियों फूलो का नित रसपान किया करती है
मधु संचय हित उर में छत्ते का निर्माण किया करती है
किन्तु एक ऐसा भी मोका आता है मानव जीवन में
जब संचित रस का अधिकारी कोई छा जाता है मन में
कर लेती है रसिक प्रियतमे जब रसपान मधु संचय का
तो केवल छत्ता बचता है होता ह्रदय मोम मानव का
जो थोड़ी सी गर्मी पाकर झट से पिघल फिघल जाता है
जब ये छत्ता गल जाता है समझो योवन ढल जाता है
तो ओ मोम ह्रदय दिलवालों,घोटू यही कहा करता है
रस तो थोड़े ही दिन रहता फिर तो मोम रहा करता है
इसीलिए यदि सुन्दरता का दृग रसपान करे करने दो
रस संचय में कभी न चूको;छत्ते को रस से भरने दो
JEEVAN KE MADHURIM BASANT MEIN
IN THE PRIME OF OUR YOUTH
THE WORLD LOOKS BLOOMING WITH FLOWER
AND EYES LIKE GREEDY BEES
WANDER HERE AND THERE
AND KISSESAND SUCKS THE JUICE
FROM FLOWERS BEAUTIFUL AND NICE
AND MAKES A HONEYCOMB IN HEART
TO COLLECT THE NECTOR OF LIFE
BUT THEN COMES IN YOUR LIFE
SOME CHARMING,LOVELY DEAR
WHO STARTS LIVING IN YOUR HEART
AND OWNS THE STOCK OF NECTOR
ANDSLOWLY SLOWLY AND SLOWLY
THAT DARLING BEAUTIFUL WIFE
WITH ALL THE LOVE AND AFFECTION
SUCKS ALL THE NECTOR OF LIFE
AND EMPTY BECOMES THE COMB
A LUMP OF WAX ,IT IS FELT
WITH A VERY LITTLE OF WARMTH
THE WAX STARTS GETTING MELT
THAT’SWHY WE BECOME SOFT HEARTED
WHEN OLDER AND OLDER WE GROW
THE JUICE IS ONLY IN YOUTH
IT IS WAX LATER THAT FLOW
HENCE WHENEVER YOU SEE ABEAUTY
LET BEES OF YOUR EYES FLY
AND KEEP THE HONERCOMB REFILLING
DO’NT MISS JUST TRY AND TRY
रस की लोभी मधुमख्खी सी चंचल दृग की चंचल चितवन
महक रहे कलियों फूलो का नित रसपान किया करती है
मधु संचय हित उर में छत्ते का निर्माण किया करती है
किन्तु एक ऐसा भी मोका आता है मानव जीवन में
जब संचित रस का अधिकारी कोई छा जाता है मन में
कर लेती है रसिक प्रियतमे जब रसपान मधु संचय का
तो केवल छत्ता बचता है होता ह्रदय मोम मानव का
जो थोड़ी सी गर्मी पाकर झट से पिघल फिघल जाता है
जब ये छत्ता गल जाता है समझो योवन ढल जाता है
तो ओ मोम ह्रदय दिलवालों,घोटू यही कहा करता है
रस तो थोड़े ही दिन रहता फिर तो मोम रहा करता है
इसीलिए यदि सुन्दरता का दृग रसपान करे करने दो
रस संचय में कभी न चूको;छत्ते को रस से भरने दो
JEEVAN KE MADHURIM BASANT MEIN
IN THE PRIME OF OUR YOUTH
THE WORLD LOOKS BLOOMING WITH FLOWER
AND EYES LIKE GREEDY BEES
WANDER HERE AND THERE
AND KISSESAND SUCKS THE JUICE
FROM FLOWERS BEAUTIFUL AND NICE
AND MAKES A HONEYCOMB IN HEART
TO COLLECT THE NECTOR OF LIFE
BUT THEN COMES IN YOUR LIFE
SOME CHARMING,LOVELY DEAR
WHO STARTS LIVING IN YOUR HEART
AND OWNS THE STOCK OF NECTOR
ANDSLOWLY SLOWLY AND SLOWLY
THAT DARLING BEAUTIFUL WIFE
WITH ALL THE LOVE AND AFFECTION
SUCKS ALL THE NECTOR OF LIFE
AND EMPTY BECOMES THE COMB
A LUMP OF WAX ,IT IS FELT
WITH A VERY LITTLE OF WARMTH
THE WAX STARTS GETTING MELT
THAT’SWHY WE BECOME SOFT HEARTED
WHEN OLDER AND OLDER WE GROW
THE JUICE IS ONLY IN YOUTH
IT IS WAX LATER THAT FLOW
HENCE WHENEVER YOU SEE ABEAUTY
LET BEES OF YOUR EYES FLY
AND KEEP THE HONERCOMB REFILLING
DO’NT MISS JUST TRY AND TRY
chaya ka pyala
चाय का प्याला
एक बार जब नीलगिरी में
पहुँच गया मैं मतवाला
हरी ओदनी में बेठी थी
एक सलोनी सी बाला
बोली मुझको देख रहे क्यों
प्यार भरी नज़रों से तुम
मुझको पाना हो तो पीलो
गरम चाय का एक प्याला
रोज़ लगा कराती होठों से
रंग गुलाबी है प्यारा
जिसके रगरग में गर्मी है
रातों हमें जगा डाला
यदि बिस्तर पर मिल जाये तो
कितनी प्यारी लगती है
पत्नी के सब गुण हैं जिसमे
वो है चाय भरा प्याला
भला बताओ किसके मन में
नहीं चाह की है ज्वाला
बोलो जग में कौन नहीं है
किसी चाह में मतवाला
टेडी मंदी चाह रह है,
मुश्किल राहत चाहत में
चाह राह में आह मिले तो
पीयो चाय भरा प्याला
रूप जल भ्रमजाल कठिन है
खोया मई भोलाभाला
श्वेत रंग में मन उलझा कर
भटक रहा था मतवाला
लेकिन एक सलोनी बाला
मुझे रास्ता दिखा गयी
कला तन रस रंग गुलाबी
मिला चाय का एक प्याला
भेद भाव को दूर भगाने,
होटल है मंदिर आला
जिस प्याले से भंगी पीता,
उससे ही पीता लाला
मेरा अगर चले बस तो
हर मंदिर में होटल खोलू
चरणामृत के बदले बाटू
सबको चाय भरा प्याला
दूध दही की नदिया बहती,
है यह बात बड़ी आला
लेकिन इस पर नहीं भरोसा
करता कोई समझ वाला
अरे दूध काभी क्या पीना,
वो तो बच्चे पीते है
समझदार की परिभाषा है,
पीये चाय भरा प्याला
गंगा जैसी बहती आई,
उजली दूध भरी धरा
सरस्वती सी शकर गुप्त थी,
जमना जैसी जल धारा
रेती ने रंग किया गुलाबी,
जब ये तीनो धर मिली
ये ही संगम,ये ही त्रिवेणी
ये है चाय भरा प्याला
कभी कंही कोई उपवन में,
हरी भरी थी एक बाला
प्रेमी ने दिल जला दिया तो,
जल कर रंग हुआ कला
अरमानो का खून जमा है
पर उस काली काया में
जो आंसू से घुलमिल बनता,
गर्म चाय जा एक प्याला
रोज सुबह जलती है लाखों
के मन में किसकी ज्वाला
रोज सुबह लाखों होठों को
कौन चूमता मतवाला
रोज सुबह किसका आना सुन
आँखों में आती रौनक
कई करोड़ों प्रेमी जिसके
वह है एक चाय प्याला
अगर प्रियतमा पास नहीं हो
और समा हो मतवाला
तारे गिन गिन रात गुजारा
करता था प्रिय दिलवाला
विरही दिल की विरह वेदना
कम करने आया जग में
आँखों में ही रात कटे यदि
पियो चाय का एक प्याला
जिन होठों को चूमा करता
रोज रोज ही जो प्याला
उस प्याले को चूम रहा मैं
खुशनसीब हूँ मतवाला
इसका मतलब किसी तरह भी
मैंने उनको चूम लिया
प्रेमी दिल की प्यास बुझाने
आया चाय भरा प्याला
देखी होगी मधुबाला भी
देखी होगी मधुशाला
छलक जाए जो जाम अगर तो
बिखर जाए सारी हाला
पर यदि छलके तो नीचे
आस लगाये प्लेट पड़ी
हाला से ज्यादा प्यारा है
सबको चाय भरा प्याला
दृश्य अभी भी बसा हुआ है
मन में प्रथम मिलन वाला
शरमा सकुचाती आई तुम
नजरें झुका लिए प्याला
मैंने भी झुक तेरी पहली
छवि देखी थी प्याले में
फिर होठों से लगा लिया था
तेरा चाय भरा प्याला
एक बार जब नीलगिरी में
पहुँच गया मैं मतवाला
हरी ओदनी में बेठी थी
एक सलोनी सी बाला
बोली मुझको देख रहे क्यों
प्यार भरी नज़रों से तुम
मुझको पाना हो तो पीलो
गरम चाय का एक प्याला
रोज़ लगा कराती होठों से
रंग गुलाबी है प्यारा
जिसके रगरग में गर्मी है
रातों हमें जगा डाला
यदि बिस्तर पर मिल जाये तो
कितनी प्यारी लगती है
पत्नी के सब गुण हैं जिसमे
वो है चाय भरा प्याला
भला बताओ किसके मन में
नहीं चाह की है ज्वाला
बोलो जग में कौन नहीं है
किसी चाह में मतवाला
टेडी मंदी चाह रह है,
मुश्किल राहत चाहत में
चाह राह में आह मिले तो
पीयो चाय भरा प्याला
रूप जल भ्रमजाल कठिन है
खोया मई भोलाभाला
श्वेत रंग में मन उलझा कर
भटक रहा था मतवाला
लेकिन एक सलोनी बाला
मुझे रास्ता दिखा गयी
कला तन रस रंग गुलाबी
मिला चाय का एक प्याला
भेद भाव को दूर भगाने,
होटल है मंदिर आला
जिस प्याले से भंगी पीता,
उससे ही पीता लाला
मेरा अगर चले बस तो
हर मंदिर में होटल खोलू
चरणामृत के बदले बाटू
सबको चाय भरा प्याला
दूध दही की नदिया बहती,
है यह बात बड़ी आला
लेकिन इस पर नहीं भरोसा
करता कोई समझ वाला
अरे दूध काभी क्या पीना,
वो तो बच्चे पीते है
समझदार की परिभाषा है,
पीये चाय भरा प्याला
गंगा जैसी बहती आई,
उजली दूध भरी धरा
सरस्वती सी शकर गुप्त थी,
जमना जैसी जल धारा
रेती ने रंग किया गुलाबी,
जब ये तीनो धर मिली
ये ही संगम,ये ही त्रिवेणी
ये है चाय भरा प्याला
कभी कंही कोई उपवन में,
हरी भरी थी एक बाला
प्रेमी ने दिल जला दिया तो,
जल कर रंग हुआ कला
अरमानो का खून जमा है
पर उस काली काया में
जो आंसू से घुलमिल बनता,
गर्म चाय जा एक प्याला
रोज सुबह जलती है लाखों
के मन में किसकी ज्वाला
रोज सुबह लाखों होठों को
कौन चूमता मतवाला
रोज सुबह किसका आना सुन
आँखों में आती रौनक
कई करोड़ों प्रेमी जिसके
वह है एक चाय प्याला
अगर प्रियतमा पास नहीं हो
और समा हो मतवाला
तारे गिन गिन रात गुजारा
करता था प्रिय दिलवाला
विरही दिल की विरह वेदना
कम करने आया जग में
आँखों में ही रात कटे यदि
पियो चाय का एक प्याला
जिन होठों को चूमा करता
रोज रोज ही जो प्याला
उस प्याले को चूम रहा मैं
खुशनसीब हूँ मतवाला
इसका मतलब किसी तरह भी
मैंने उनको चूम लिया
प्रेमी दिल की प्यास बुझाने
आया चाय भरा प्याला
देखी होगी मधुबाला भी
देखी होगी मधुशाला
छलक जाए जो जाम अगर तो
बिखर जाए सारी हाला
पर यदि छलके तो नीचे
आस लगाये प्लेट पड़ी
हाला से ज्यादा प्यारा है
सबको चाय भरा प्याला
दृश्य अभी भी बसा हुआ है
मन में प्रथम मिलन वाला
शरमा सकुचाती आई तुम
नजरें झुका लिए प्याला
मैंने भी झुक तेरी पहली
छवि देखी थी प्याले में
फिर होठों से लगा लिया था
तेरा चाय भरा प्याला
श्राद्ध
श्राद्ध
एक दिन बाद
बहू को आया याद
अरे कल था ससुरजी का श्राद्ध
आधुनिका बहू ने क्या किया
डोमिनोस को फोन किया
और एक पिज़ा पंडितजी के यहाँ भिजवादिया
ब्राहमण भोजन का ये मोडर्न स्टाइल था
दक्षिणा के नाम पर कोक मोबाइल था
रातससुरजी सपने में आये
थोड़े से मुस्कराए
बोले शुक्रिया
मरने के बाद ही सही,याद तो किया
पिज़ा अच्छा था,भले ही लेट आया
मैंने मेनका और रम्भा के साथ खाया
उन्हें भी पसंद आया
बहू बोली,अच्छा तो आप अप्सराओं के साथ खेल रहे है
और हम यहाँ कितनी मुसीबतें झेल रहे है
महगाई का दोर बड़ता ही जाता है
पिज़ा भी चार सो रुपयों में आता है
ससुरजी बोले हमें सब खबर है भले ही दूर बैठें है
लेट हो जाने पर डोमिनो वाले भी पिज़ा फ्री में देते है
एक दिन बाद
बहू को आया याद
अरे कल था ससुरजी का श्राद्ध
आधुनिका बहू ने क्या किया
डोमिनोस को फोन किया
और एक पिज़ा पंडितजी के यहाँ भिजवादिया
ब्राहमण भोजन का ये मोडर्न स्टाइल था
दक्षिणा के नाम पर कोक मोबाइल था
रातससुरजी सपने में आये
थोड़े से मुस्कराए
बोले शुक्रिया
मरने के बाद ही सही,याद तो किया
पिज़ा अच्छा था,भले ही लेट आया
मैंने मेनका और रम्भा के साथ खाया
उन्हें भी पसंद आया
बहू बोली,अच्छा तो आप अप्सराओं के साथ खेल रहे है
और हम यहाँ कितनी मुसीबतें झेल रहे है
महगाई का दोर बड़ता ही जाता है
पिज़ा भी चार सो रुपयों में आता है
ससुरजी बोले हमें सब खबर है भले ही दूर बैठें है
लेट हो जाने पर डोमिनो वाले भी पिज़ा फ्री में देते है
shradha
श्राद्ध
जीते जी तीर्थ न करवाए मरने पर संगम जाओगे
भर पेट खिलाया कभी नहीं पंडित को श्राद्ध खिलाओगे
बस एक काम ही ऐसा है जो तब भी किया और अब भी किया
जीते जी बहुत जलाया था मरने पर भी तो जलाओगे
जीते जी तीर्थ न करवाए मरने पर संगम जाओगे
भर पेट खिलाया कभी नहीं पंडित को श्राद्ध खिलाओगे
बस एक काम ही ऐसा है जो तब भी किया और अब भी किया
जीते जी बहुत जलाया था मरने पर भी तो जलाओगे
Tuesday, September 21, 2010
पो फटी
पो फटी
कलियाँ चटकी
भ्रमरों के गुंजन स्वर महके
डाल डाल पर पंची कहके
गों रामभाई
मंदिर से घंटा ध्वनि आई
शंखनाद भी दिया सुनाई
मंद समीरण के झोंको ने आ थपकाया
प्रकृति ने कितने ही स्वर से मुझे जगाया
लेकिन मेरी नींद न टूटी
किन्तु फ़ोन की एक घंटी से मैं जग बैठा
कितना भौतिक
मुझको है धिक्
कलियाँ चटकी
भ्रमरों के गुंजन स्वर महके
डाल डाल पर पंची कहके
गों रामभाई
मंदिर से घंटा ध्वनि आई
शंखनाद भी दिया सुनाई
मंद समीरण के झोंको ने आ थपकाया
प्रकृति ने कितने ही स्वर से मुझे जगाया
लेकिन मेरी नींद न टूटी
किन्तु फ़ोन की एक घंटी से मैं जग बैठा
कितना भौतिक
मुझको है धिक्
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