क्षणिकायें
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पी.ए
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साहब के पी. ए .हैं,
पत्नी के पिया
बच्चों के डबल पी ए
याने कि पापा
खतरा
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मेरी पत्नी को,
कोई खतरा,
न उनसे है,न इनसे है
सिर्फ,
पड़ोसन कि 'सिन' से है
विरह गीत
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तुम वहां,
मै यहाँ,
इतनी दूर और ऐसे
बीरबल कि खिचड़ी
पके तो कैसे
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
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पी.ए
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साहब के पी. ए .हैं,
पत्नी के पिया
बच्चों के डबल पी ए
याने कि पापा
खतरा
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मेरी पत्नी को,
कोई खतरा,
न उनसे है,न इनसे है
सिर्फ,
पड़ोसन कि 'सिन' से है
विरह गीत
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तुम वहां,
मै यहाँ,
इतनी दूर और ऐसे
बीरबल कि खिचड़ी
पके तो कैसे
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
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